➡️ नरसिंहपुर/राजनांदगांव: मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र की संयुक्त सीमा पर बुधवार तड़के हॉक फोर्स और नक्सलियों के बीच हुई जोरदार मुठभेड़ में हॉक फोर्स के बहादुर इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हो गए। आशीष शर्मा को अपनी वीरता के लिए दो बार वीरता पदक मिल चुका था। गुरुवार को उनके पैतृक गांव बोहानी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए घोषणा की कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
तीन राज्यों की संयुक्त एंटी-नक्सल ऑपरेशन टीम का कर रहे थे नेतृत्व
➡️ बोहानी गांव के निवासी और 2016 बैच के प्लाटून कमांडर आशीष शर्मा बुधवार को मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की संयुक्त टीम का नेतृत्व कर रहे थे।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर वे टीम के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन पर निकले।
इसी दौरान नक्सलियों ने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी। भीषण गोलीबारी में आशीष शर्मा के सीने, पेट और पैर में गोलियां लगीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शादी होने वाली थी, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
➡️ शहीद आशीष शर्मा के पिता देवेन्द्र शर्मा किसान हैं। उनका एक छोटा भाई भी है जो भोपाल में पढ़ाई कर रहा है।
सबसे दुखद बात यह है कि आशीष शर्मा की शादी जनवरी में होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही यह दर्दनाक घटना हो गई।
देश सेवा के दौरान असाधारण बहादुरी दिखाने पर उन्हें दो बार वीरता पदक से सम्मानित किया गया था।










