ब्रेकिंग न्यूज/धान नहीं बिका, सिस्टम बिक गया! ज़हर पीने को मजबूर हुआ किसान, डबल इंजन सरकार से सवाल

ब्रेकिंग न्यूज/धान नहीं बिका, सिस्टम बिक गया! ज़हर पीने को मजबूर हुआ किसान, डबल इंजन सरकार से सवाल

कोरबा।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को “महा त्यौहार” कहा जाता है। लेकिन कोरबा में ये त्यौहार नहीं, किसानों के लिए इम्तिहान बन गया है। सवाल सीधा है — जब सरकार कह रही है कि रिकॉर्ड खरीदी हो रही है, तो फिर किसान धान लेकर दर-दर क्यों भटक रहा है?
ग्राम पुटा, हरदीबाजार के किसान सुमेर सिंह पिछले एक महीने से सरकारी खरीदी केंद्रों के चक्कर काट रहे थे। न धान बिका, न टोकन मिला। हर बार एक ही जवाब — “आज नहीं, कल आना।”
और आखिरकार जब “कल” कभी आया ही नहीं, तो किसान ने ज़हर पी लिया।

अब सोचिए —
किसान ज़हर पी रहा है और सिस्टम फाइलें पी रहा है!
किसान जनदर्शन गया। वहां भी सुनवाई नहीं हुई। मतलब साफ है —
कागजों में सब ठीक, ज़मीन पर सब चौपट!
जैसे ही मामला सामने आया, कोरबा प्रवास पर रहीं सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत जिला अस्पताल पहुंचीं और किसान से मुलाकात की।

लेकिन असली सवाल ये है —
किसने सुमेर सिंह को इस हालत में पहुंचाया?
धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ी की शिकायतें रोज़ आ रही हैं। मीडिया चिल्ला रहा है। भाजपा-कांग्रेस के युवा नेता ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन ना फड़ प्रभारी पर कार्रवाई, ना केंद्र प्रबंधक पर गाज।

तो सवाल ये है —
क्या अफसरों की कुर्सी किसान की जान से ज़्यादा कीमती है?
सरकार कह रही है — “सब ठीक है।”
ज़मीनी हकीकत कह रही है — “कुछ भी ठीक नहीं है।”
अगर वाकई सरकार और प्रशासन में थोड़ी भी संवेदना बची है, तो इस मामले में निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अफसर नपें, वरना अगली खबर फिर किसी किसान के ज़हर पीने की होगी… और फिर हम सिर्फ “ब्रेकिंग न्यूज़” चलाएंगे।