SECL कुसमुण्डा खदान में सुरक्षा व श्रमिक हितों की अनदेखी, एरिया जेसीसी निर्णयों पर अमल नहीं – श्रमिक संगठनों का आरोप

SECL कुसमुण्डा खदान में सुरक्षा व श्रमिक हितों की अनदेखी, एरिया जेसीसी निर्णयों पर अमल नहीं – श्रमिक संगठनों का आरोप


कुसमुण्डा क्षेत्र की खदान में प्रबंधन द्वारा लिए गए निर्णयों पर अमल न होने को लेकर श्रमिक संगठनों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। 03 नवंबर 2025 को आयोजित एरिया जेसीसी (Joint Consultative Committee) बैठक के उपरांत जारी कार्यवृत्त पत्र क्रमांक 2710 दिनांक 05 नवंबर 2025 में कई गंभीर त्रुटियाँ पाई गई हैं। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि कार्यवृत्त में केवल आवास आबंटन से संबंधित बिंदु को प्रमुखता से दर्शाकर चार श्रमिक संगठनों को बदनाम करने का प्रयास किया गया।
इस संबंध में प्रबंधन को तत्काल अवगत कराया गया था, जिस पर संशोधित कार्यवृत्त जारी करने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन आज दिनांक तक न तो संशोधित कार्यवृत्त जारी किया गया और न ही बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों पर कोई अमल हुआ है। श्रमिक संगठनों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे खदान में कार्यरत मजदूरों के प्रति प्रबंधन की उदासीनता स्पष्ट होती है। इसी कारण खदान में मोटरसाइकिल प्रवेश की पूर्व व्यवस्था को तत्काल बहाल करने की मांग उठाई गई है।


बायोमैट्रिक उपस्थिति को लेकर भी प्रबंधन पर निर्णय उल्लंघन का आरोप


दिनांक 27 अक्टूबर 2025 को हुई एरिया जेसीसी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि पहले कुसमुण्डा क्षेत्र/खदान में कार्यरत ठेकेदारी कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमैट्रिक प्रणाली से दर्ज कराई जाएगी, उसके बाद ही नियमित कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू होगी। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा नियमित कर्मचारियों के लिए पुनः बायोमैट्रिक उपस्थिति संबंधी कार्यालय आदेश जारी कर दिया गया, जिसे श्रमिक संगठनों ने बैठक के निर्णयों का सीधा उल्लंघन बताया है। संयुक्त श्रमिक संगठनों ने स्पष्ट मांग की है कि पहले ठेकेदारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।


डीजीएमएस निर्देशों का उल्लंघन, दुर्घटना की आशंका


श्रमिक संगठनों ने खदान की हॉल रोड सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि कुसमुण्डा खदान में 240 टन, 100 टन डंपर एवं टिपर वाहनों को एक ही हॉल रोड पर एक साथ चलाया जा रहा है, जो डीजीएमएस (DGMS) द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का घोर उल्लंघन है। इस प्रकार भारी वाहनों के एक साथ परिचालन से गंभीर दुर्घटनाओं और ऑपरेटरों की जान जाने की प्रबल संभावना बनी हुई है। संगठनों ने इस पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

डीजल चोरी की घटनाएं बढ़ीं, डंपर ऑपरेटरों को बनाया जा रहा बलि का बकरा


कुसमुण्डा खदान में वर्तमान में RFID कार्ड के माध्यम से ही चार पहिया वाहनों का प्रवेश किया जा रहा है, इसके बावजूद एचईएमएम (MM) मशीनों से डीजल चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आरोप है कि डीजल चोर चार पहिया वाहनों की मदद से खदान के भीतर चोरी को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर दोषी ठहराए जा रहे हैं डंपर ऑपरेटर।


श्रमिक संगठनों का कहना है कि डंपर ऑपरेटरों को तुरंत आरोप पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। जबकि खदान में चोरी रोकने के उद्देश्य से दो पहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया था, जो पूरी तरह असफल साबित हुआ है। इसके बावजूद चोरों के हौसले बुलंद हैं। संगठनों ने स्पष्ट मांग की है कि खदान में हो रही चोरियों के मामलों में किसी भी निर्दोष डंपर ऑपरेटर को आरोप पत्र जारी न किया जाए और वास्तविक दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

सेंसेटिव पदों पर रोटेशन केवल कागजों में

विजिलेंस निर्देशों के अनुसार सेंसेटिव पदों और स्थलों पर तीन वर्षों से पदस्थ कर्मचारियों एवं अधिकारियों का रोटेशन अनिवार्य है। लेकिन श्रमिक संगठनों का आरोप है कि कुसमुण्डा क्षेत्र में यह रोटेशन सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है। वास्तविक कार्यस्थलों में बदलाव नहीं किया जा रहा। संगठनों ने मांग की है कि कुसमुण्डा क्षेत्रीय मुख्यालय, परियोजना मुख्यालय एवं खदान में तीन वर्षों से अधिक समय से सेंसेटिव पदों पर पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से वास्तविक रोटेशन किया जाए।
इन तमाम मुद्दों को लेकर कुसमुण्डा खदान में प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्णयों पर अमल नहीं किया गया, तो आंदोलनात्मक कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।