कुसमुंडा खदान विस्थापन विवाद: गेवरा समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने मुआवज़ा व बसावट को लेकर खोला मोर्चा, जल्द DRCC बैठक की मांग तेज

कुसमुंडा खदान विस्थापन विवाद: गेवरा समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने मुआवज़ा व बसावट को लेकर खोला मोर्चा, जल्द DRCC बैठक की मांग तेज

कोरबा। कुसमुंडा खदान विस्तार कार्य के चलते आसपास के कई गांवों का अधिग्रहण जारी है। इसी प्रक्रिया के तहत खोडरी पाली के लोगों को ग्राम खम्हारिया व जटराज चंद्र नगर के ग्रामीणों को जोड़ा पुल के पास स्थित डंपिंग क्षेत्र में बसाया जा रहा है। वहीं गेवरा खदान से प्रभावित नरईबोध गांव को भी खम्हारिया के पास पुनर्वास हेतु प्रस्तावित किया गया है। इसी तरह भिलाई बाज़ार के सर्वमंगला नगर के लोग भी बसावट की मांग कर रहे हैं।

आने वाले समय में कुसमुंडा खदान विस्तार के चलते गेवरा बस्ती, बरपाली सहित कई गांवों का विस्थापन होना तय है। ग्रामीणों का कहना है कि आज तक न तो सही बसावट मिली है और न रोजगार सहित अन्य सुविधाओं पर कोई ठोस निर्णय। ऐसे में प्रभावित गांव अब अपने अधिकारों को लेकर सामूहिक आंदोलन की तैयारी में हैं। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि कुसमुंडा से प्रभावित गांवों को कुसमुंडा क्षेत्र में ही बसाया जाए।

जनसुनवाई के वादों का उल्लंघन का आरोप

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2015 में इंदिरा स्टेडियम, कुसमुंडा में हुई जनसुनवाई में SECL प्रबंधन ने स्पष्ट घोषणा की थी कि गेवरा ग्राम का विस्थापन वैशालीनगर–खमरिया इलाके में किया जाएगा। लेकिन 11 वर्ष बीतने के बाद भी न तो विस्थापन प्रक्रिया शुरू हुई और न ही DRCC की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों को अब तक उनका वैध मुआवजा भी नहीं मिला है।

ग्रामीणों ने SECL पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गेवरा ग्राम के मुद्दे को नजरअंदाज करते हुए जरहाजेल डंपिंग और बरमपुर डंपिंग जैसी अन्य परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जो जनसुनवाई के वादों का खुला उल्लंघन है।

ग्रामीणों की तीन मुख्य मांगें

प्रभावित ग्रामीणों ने SECL कुसमुंडा प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए तीन तात्कालिक मांगें रखी हैं—

  1. तत्काल DRCC बैठक बुलायी जाए
    गेवरा ग्राम के विस्थापन और मुआवजा निर्धारण के लिए तुरंत DRCC Meeting आयोजित की जाए।
  2. समान प्राथमिकता दी जाए
    गेवरा ग्राम को जरहाजेल व बरमपुर डंपिंग प्रोजेक्ट्स की तरह विस्थापन प्रक्रिया में तुरंत शामिल किया जाए।
  3. 11 वर्षों का लंबित मुआवज़ा दिया जाए
    पिछले 11 सालों से अटके वैध मुआवज़े का पूर्ण भुगतान तुरंत सुनिश्चित किया जाए।

आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के अंत में ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तो गेवरा के लोग बड़े स्तर पर निर्णायक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।