होटल चंदेला में क़त्ल! प्यार के दबाव ने छीनी एक मासूम की सांसें”. “24 घंटे में खुला हत्या का राज! शादी के दबाव में प्रेमी ने गला घोंटकर की हत्या

होटल चंदेला में क़त्ल! प्यार के दबाव ने छीनी एक मासूम की सांसें”. “24 घंटे में खुला हत्या का राज! शादी के दबाव में प्रेमी ने गला घोंटकर की हत्या

सीतामणी, कोरबा की उस सर्द सुबह में शहर की हवा में अजीब-सी खामोशी तैर रही थी। तारीख थी 5 दिसंबर 2025… समय करीब 11 बजे। चंदेला होटल के स्टाफ को यह अंदाज़ा भी नहीं था कि कमरा नंबर–207 का दरवाज़ा उन्हें एक ऐसी सच्चाई दिखाने वाला है, जिसे याद कर आज भी हर किसी की रूह काँप उठती है।

कमरा नंबर-207… और एक सन्न कर देने वाला दृश्य

होटल स्टाफ ने कई बार दरवाज़ा खटखटाया, पर भीतर से कोई आवाज़… कोई हलचल नहीं। आखिर खिड़की की ओर जाकर झाँका गया तो अंदर पड़े एक पैर पर नज़र गई। स्टाफ सहम गया। हर किसी के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी।

दरवाज़ा किसी तरह खोला गया… और सामने जो दृश्य था, वह दिल दहला देने वाला था।
एक महिला निर्जीव पड़ी थी… कमरे के बीचोंबीच… पूरी तरह शांत।

पिछली रात की कहानी… जो एक खौफ़नाक मोड़ ले चुकी थी

फोरेंसिक टीम को बुलाया गया, परिजनों की पहचान कराई गई और शव को पीएम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया।
जाँच में पता चला कि 4 दिसंबर की रात महिला राकेश मानिकपुरी नामक व्यक्ति के साथ होटल आई थी और दोनों ने कमरा 207 बुक कराया था।

मृतिका के चाचा शिवा दास महंत की रिपोर्ट पर पुलिस को पहली बार शक हुआ कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है।

पुलिस की तफ्तीश और सच का खुलासा

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कहानी ने एक नया मोड़ लिया।
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितिश ठाकुर, और नगर पुलिस अधीक्षक भूषण एक्का के निर्देश पर तेज़ी से टीम बनाई गई।

कुछ ही घंटों में संदेही राकेश मानिकपुरी को पकड़ लिया गया।
पूछताछ में उसने जो बताया, वह और भी चौंकाने वाला था—

“वह मुझे शादी के लिए दबाव दे रही थी… और उसी गुस्से में मैंने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।”

उसकी यह स्वीकारोक्ति जैसे कमरे 207 की दीवारों में बसी खामोशी को चीरते हुए गूँज उठी।

पुलिस की सजगता — 24 घंटे में खुलासा

सिर्फ 24 घंटों में हत्या का मामला सुलझा लिया गया।
थाना कोतवाली की टीम—
उपनिरीक्षक महासिंह धुर्वे, उपनिरीक्षक शारदा वर्मा, सउनि रामकुमार उईके, आरक्षक चंद्रकांत गुप्ता और साइबर सेल के आरक्षक आलोक टोप्पो तथा श्याम सिदार—
सबकी मेहनत ने इस जघन्य अपराध पर से परदा उठा दिया।

आरोपी को न्यायालय में पेश कर ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया गया।


कमरा नंबर-207 की यह घटना आज भी याद दिलाती है कि रिश्तों के नाम पर पनपने वाले तनाव, जब हिंसा में बदलते हैं… तो केवल एक क्षण पूरे जीवन को तबाह कर देता है।