छत्तीसगढ़ में कोल प्रोजेक्ट को मंजूरी, हसदेव अरण्य में लाखों पेड़ों की कटाई का खतरा बढ़ा

छत्तीसगढ़ में कोल प्रोजेक्ट को मंजूरी, हसदेव अरण्य में लाखों पेड़ों की कटाई का खतरा बढ़ा

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित कोल परियोजना को अंतिम मंजूरी दे दी है। यह स्वीकृति 25 नवंबर 2025 को जारी हुई, जिसके बाद प्रदेश के सबसे समृद्ध जंगलों में से एक हसदेव में करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो गया है। पर्यावरणविदों और स्थानीय आदिवासी संगठनों में इस फैसले को लेकर गहरा विरोध है।


परियोजना के दायरे में आएगा 1742 हेक्टेयर जंगल

मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार—

कुल 1742.600 हेक्टेयर भूमि परियोजना के लिए अधिसूचित की गई है।

इसमें लगभग 1742 हेक्टेयर शुद्ध वनभूमि शामिल है।

इस कोल ब्लॉक का संचालन MDO मॉडल पर होगा, जिसके लिए अडानी समूह चुना गया है।

हसदेव बचाओ आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि पेड़ों की कटाई का वास्तविक आंकड़ा 7 लाख से भी अधिक है, जबकि सरकारी दस्तावेज़ों में यह संख्या 4.48 लाख दर्ज की गई है।


ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी भी खतरे की जद में

अनुमति पत्र में 10 किमी दायरे में किसी ऐतिहासिक स्थल या हाथी कॉरिडोर की गैर-मौजूदगी का दावा किया गया है।
लेकिन स्थानीय संगठनों का कहना है कि–

रामगढ़ पहाड़ी, जो छत्तीसगढ़ की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक स्थल है, परियोजना स्थल से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित है।

यह इलाका एलिफेंट कॉरिडोर के अंदर आता है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ने की आशंका है।


विशेषज्ञ बोले—यह विनाश की शुरुआत

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष पांडे के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से—

वायु गुणवत्ता में 50 पॉइंट तक गिरावट

भूजल स्तर में लगभग 100 फीट तक कमी

स्थानीय जलस्रोतों के सूखने

और ईकोसिस्टम पर गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका है।

उनका कहना है कि इस क्षेत्र में रहने वाले लाखों जीव-जंतुओं और वन संसाधनों पर निर्भर आदिवासी समुदायों की आजीविका भी गंभीर खतरे में पड़ जाएगी।


हसदेव को बचाने की कानूनी तैयारी

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और हसदेव बचाओ आंदोलन लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े आलोक शुक्ला का आरोप है कि सरकार ने प्रधानमंत्री के आगमन से पहले ही प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर को खतरे में डालकर कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा दिया है।
अब संगठन कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है।