छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र के सैकड़ों खातेदारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। वर्षों से रोजगार से वंचित रहे उन युवाओं को अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, जिन्हें एसईसीएल (SECL) ने “अर्जन के बाद जन्मे” बताकर रोजगार देने से इंकार कर दिया था।
⚖️ पृष्ठभूमि: वर्ष 2014 से रोकी गई भर्ती प्रक्रिया
एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका एवं कोरबा क्षेत्रों में अर्जन के बाद जन्मे खातेदारों के बच्चों को पहले रोजगार दिया जा रहा था, लेकिन वर्ष 2014 में अचानक प्रबंधन ने नीति बदलते हुए ऐसे सभी आवेदकों को “अयोग्य” घोषित कर दिया।
इस निर्णय से सैकड़ों पात्र युवाओं को रोजगार से वंचित होना पड़ा। इसके विरोध में प्रभावित खातेदारों ने लंबे समय तक आंदोलन किया और अंततः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
🧑⚖️ राहुल जायसवाल केस बना मिसाल
कुसमुंडा परियोजना के खातेदार के पुत्र राहुल जायसवाल ने माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में WPS No. 6186 / 2019 के अंतर्गत याचिका दायर की थी।
18 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एसईसीएल को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को तीन माह के भीतर रोजगार दिया जाए।
एसईसीएल ने इस आदेश को डबल बेंच में चुनौती दी, लेकिन वहां भी अपील खारिज हो गई। इसके बाद एसईसीएल सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां से भी अपील को सिरे से खारिज कर दिया गया।
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि —
“अर्जन के बाद जन्मे व्यक्ति भी एसईसीएल में रोजगार के लिए पात्र हैं।”
✊ माटी अधिकार मंच का संघर्ष जारी
माटी अधिकार मंच संगठन ने अर्जन के बाद जन्मे युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए पिछले तीन वर्षों से लगातार आंदोलन किया है।
13-14 अगस्त को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में अनिश्चितकालीन गेट जाम, और 9 सितंबर को कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय का गेट जाम इसी लड़ाई का हिस्सा था।
इन आंदोलनों के बाद कई त्रिपक्षीय वार्ताएं आयोजित की गईं —
14 अगस्त को सीएमडी बिलासपुर के साथ
13 अक्टूबर को मुख्यालय बिलासपुर में
14 अक्टूबर को एसडीएम कार्यालय कटघोरा में
एसडीएम कटघोरा ने संगठन को आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद यह नीति सभी खातेदारों पर लागू की जाएगी।
मुख्यालय के अधिकारियों ने भी कहा कि कानूनी विभाग की अनुशंसा के बाद रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
🗣️ संगठन की चेतावनी और आगामी रणनीति
माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार श्रीवास ने कहा कि
“एसईसीएल अब सार्वभौमिकता के सिद्धांत पर सभी पात्रों को न्याय देने के लिए तैयार है। संगठन तब तक संघर्ष जारी रखेगा, जब तक सभी खातेदारों को रोजगार नहीं मिल जाता।”
एसईसीएल पर कार्रवाई के लिए संगठन की आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें कुसमुंडा, गेवरा, दीपका सहित अन्य परियोजनाओं के खातेदार और उम्मीदवार शामिल हुए।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि रोजगार प्रक्रिया में देरी या टालमटोल की गई, तो मुख्यालय और एरिया स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
संगठन की अगली बैठक 2 नवंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें अर्जन के बाद जन्मे उम्मीदवारों, खाता संयोजन एवं अन्य मुद्दों पर चर्चा कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।











