मदन दास की रिपोर्ट
करतला। करतला विकासखंड के अमलीभांठा गांव में संचालित सुरुचि क्लिनिक पर बड़ा खुलासा हुआ है। यहां बीएएमएस डिग्रीधारी डॉक्टर प्रदीप कश्यप द्वारा खुलेआम एलोपैथी इलाज किया जा रहा है। न केवल एलोपैथी दवाइयां बल्कि मरीजों को भर्ती करने से लेकर खून चढ़ाने तक की सुविधा यहां उपलब्ध है। आश्चर्य की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की औचक जांच में यह सब सामने आने के बावजूद अब तक किसी कड़ी कार्यवाही नहीं हुई।
क्लिनिक के नाम पर अस्पताल, एलोपैथी इलाज का खेल
डॉ. प्रदीप कश्यप एक आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, लेकिन अपने क्लिनिक को अस्पताल का रूप देकर मरीजों का एलोपैथी पद्धति से इलाज कर रहे हैं। उनके यहां बेड, भर्ती की सुविधा, खून जांच और ब्लड ट्रांसफ्यूजन तक की व्यवस्था है।
स्वास्थ्य विभाग का औचक निरीक्षण, फिर भी कार्रवाई नहीं
सूत्रों के मुताबिक, औचक निरीक्षण के दौरान टीम ने एक महिला मरीज को भर्ती पाया, जिसे आरएल (RL) की बोतल चढ़ाई जा रही थी। क्लिनिक में एलोपैथी की दवाइयां और आधुनिक जांच उपकरण भी मिले। इसके बावजूद विभाग ने सिर्फ नोटिस जारी कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे साफ है कि डॉक्टर को विभागीय संरक्षण प्राप्त है।
पत्रकारों पर झूठे आरोकरतला में बड़ा खुलासा: आयुर्वेद डिग्रीधारी डॉक्टर कर रहा एलोपैथी इलाज, क्लीनिक बना रखा है अस्पताल – स्वास्थ्य विभाग की चुप्पीप लगाना पुराना हथकंडा
जब भी डॉ. प्रदीप कश्यप के खिलाफ मीडिया में खबरें प्रकाशित होती हैं, वे मामले को दबाने के लिए पत्रकारों पर झूठे आरोप लगाते हैं। हाल ही में पत्रकार प्रमोद गुप्ता और उनके साथी पर 1 लाख रुपए मांगने का झूठा आरोप लगाया गया।
पहले भी भेज चुके हैं लीगल नोटिस
इससे पहले जब आधार स्तंभ और समाचार मित्र जैसे पोर्टल्स पर उनके खिलाफ खबरें छपीं, तब डॉक्टर ने संपादकों को वकील के जरिए लीगल नोटिस भेजा था। लेकिन जब संपादकों ने कानूनी जवाब दिया तो वे आगे कोई परिवाद दर्ज नहीं करा पाए। यह साबित करता है कि उनके नोटिस सिर्फ डराने और दबाव बनाने का तरीका थे।
सवाल उठता है – कब होगी कार्रवाई?
सुरुचि क्लिनिक का मामला सिर्फ अवैध अस्पताल संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और संरक्षण भी उजागर होता है। सवाल यह है कि कब तक एक आयुर्वेदिक डॉक्टर एलोपैथी इलाज कर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करता रहेगा और विभाग चुपचाप देखता रहेगा?











