बिलासपुर। NTPC सीपत फ्लाईऐश ट्रांसपोर्ट घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। जानकारी के मुताबिक, मस्तूरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है कि सीपत एनटीपीसी से राखड़ (Fly Ash) का अवैध परिवहन किया जा रहा है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आर्शीवाद ट्रांसपोर्ट, जिसका संचालन बिल्हा निवासी मोनू राजपाल करता है, को NTPC से फ्लाईऐश ट्रांसपोर्ट का वर्क ऑर्डर मिला हुआ है। कंपनी को सीपत से उरगा-पत्थलगांव तक राखड़ पहुंचाना था, जिसकी दूरी करीब 120-130 किलोमीटर है। लेकिन मिलीभगत से ट्रकों में भरी राखड़ को पत्थलगांव की बजाय महज 10-12 किलोमीटर दूर स्थित जयरामनगर खैरा पत्थर खदान में डंप किया जा रहा था।
8 वाहन रंगे हाथ पकड़े गए
10 सितंबर 2025 को इस अवैध गतिविधि का भंडाफोड़ हुआ, जब राखड़ लेकर जा रहे 8 ट्रेलर वाहनों (नंबर: CG 10 BJ 9686, CG 10 BJ 9979, CG 10 BS 9455, CG 10 BJ 9389, CG 10 BJ 9474, CG 10 BJ 9383, CG 10 BS 9105 और एक अज्ञात वाहन) को पकड़ा गया। इन वाहनों पर कोई वैध NOC भी उपलब्ध नहीं थी।
आरोप है कि परिवहन में लगे जीपीएस सिस्टम और चालान-पर्चियों के साथ भी फर्जीवाड़ा किया गया। ट्रकों के वास्तविक डंपिंग पॉइंट को बदलकर चालान को पत्थलगांव तक दिखाया गया और फिर एनएचएआई अधिकारियों की मिलीभगत से इन चालानों पर रिसिविंग कराकर उन्हें एनटीपीसी सीपत में वापस जमा किया जाता रहा।
करोड़ों का घोटाला
सूत्रों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसमें NTPC अधिकारियों और दलालों की सांठगांठ है। इस घोटाले से अब तक लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि—
टोल प्लाजा और राखड़ डेम गेट पर लगे सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
आर्शीवाद ट्रांसपोर्ट और संबंधित वाहनों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जाए।
दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए और अवैध राखड़ परिवहन पर रोक लगे।











