छत्तीसगढ़ में गायों की दयनीय स्थिति: सड़क पर आवारा मवेशियों से बढ़ रहा खतरा
छत्तीसगढ़ में आज सबसे बड़ी समस्या आवारा गायों और मवेशियों की सड़कों पर मौजूदगी है। हालत यह है कि शहर हो या गाँव, हर जगह गायें खुलेआम सड़कों पर घूमती दिखाई देती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि आए दिन सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं। कई बार इन हादसों में इंसानों की जान जाती है, तो कई बार बेगुनाह मवेशी मौत का शिकार हो जाते हैं।गाँवों की तस्वीर भी अब बदल चुकी है। जहाँ पहले हर घर में लोग गाय-भैंस पालते थे, वहीं अब 95% घरों में गाय नहीं मिलती। वजह साफ है—गाँवों में कच्चे मकानों की जगह पक्के मकान बन चुके हैं और नई पीढ़ी गोबर उठाने या पशुपालन की जिम्मेदारी लेना नहीं चाहती। यही कारण है कि गाय और बैल अब गाँवों से निकलकर शहरों और कॉलोनियों की सड़कों पर दिखाई देने लगे हैं।
सरकार की उदासीनता
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इन गायों की समस्या को लेकर सरकार अब तक ठोस कदम नहीं उठा पाई है। अगर कोई गाय ट्रक या वाहन की चपेट में आ जाती है, तो घंटों सड़क जाम हो जाता है। आम लोग गुस्से में आकर चक्का जाम भी कर देते हैं, लेकिन यह सिर्फ हादसे के समय तक ही सीमित रह जाता है।वास्तविक जरूरत इस बात की है कि सरकार ऐसी नीति बनाए जिससे कोई भी गाय सड़क पर न भटके। कांग्रेस शासनकाल में गौठान योजना की शुरुआत हुई थी, लेकिन उसमें भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे और योजना का सही क्रियान्वयन नहीं हो पाया। आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्या हो समाधान?
छत्तीसगढ़ में गायों की दयनीय स्थिति: सड़क पर आवारा मवेशियों से बढ़ रहा खतराअब समय आ गया है कि विष्णुदेव सरकार इस दिशा में ठोस पहल करे। जरूरत है एक ऐसी “कृष्ण योजना” की, जिसमें न केवल गायों को सुरक्षित आश्रय मिले बल्कि लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो।अगर सरकार चाहे तो इस समस्या को अवसर में बदला जा सकता है। जैसे शराब की दुकानों को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए योजना बनाई गई है, वैसे ही गौशालाओं और गोठानों को भी संगठित किया जा सकता है।
इसके कई फायदे होंगे—
1. सड़कें दुर्घटनामुक्त होंगी – गायें सड़कों पर भटकेंगी नहीं, जिससे हादसे कम होंगे।
2. गायों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा – हर गाय को छत और चारे की सुविधा मिल सकेगी।
3. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे – स्थानीय युवाओं को गौशालाओं के प्रबंधन और गोबर आधारित उद्योगों में काम मिलेगा।
4. जैविक खाद और ऊर्जा उत्पादन – गोबर से खाद और बायोगैस बनाकर खेती और ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग किया जा सकता है।
5. शहरों का सौंदर्य और स्वच्छता – सड़कों से आवारा मवेशियों की समस्या खत्म होगी।
छत्तीसगढ़ में आवारा गायों की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। यदि अभी भी इस दिशा में ठोस और कड़े कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में सड़क हादसों और अव्यवस्था की समस्या और गहरी हो सकती है। जनता अब उम्मीद लगाए बैठी है कि विष्णुदेव सरकार आगे आकरकृष्ण बने “कृष्ण योजना” जैसी कोई मजबूत और व्यावहारिक नीति लाए, जिससे न केवल गायों को सम्मानजनक जीवन मिले, बल्कि राज्य भी दुर्घटनामुक्त और स्वच्छ बन सके।

