October 30, 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तहसीलदार नहीं, SDO जारी करेंगे SC, ST और OBC के जाति प्रमाण पत्र

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बिलासपुर | CGTMN News

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तहसीलदार सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने बिलासपुर निवासी शैली सोनकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता शैली सोनकर ने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बिलासपुर के तहसीलदार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन पर कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन लंबे समय तक न तो कोई अंतिम निर्णय लिया गया और न ही प्रमाण पत्र जारी किया गया। इससे परेशान होकर उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने सक्षम प्राधिकारी के बजाय तहसीलदार के समक्ष आवेदन किया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2013 तथा 24 सितंबर 2013 को जारी राज्य शासन के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार सामान्यतः निम्न अधिकारियों को है—

अनुविभागीय अधिकारी (SDO-राजस्व)

उप कलेक्टर

अतिरिक्त कलेक्टर

कलेक्टर

ऐसी स्थिति में केवल तहसीलदार के समक्ष आवेदन लंबित होने के आधार पर कोई राहत नहीं दी जा सकती।

नया आवेदन करने की मिली छूट

हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित SDO (राजस्व) के समक्ष नए सिरे से आवेदन करने की स्वतंत्रता दी। साथ ही निर्देश दिया कि यदि आवेदन नियमानुसार प्रस्तुत किया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार शीघ्र निर्णय लें।

फैसले का महत्व

यह निर्णय उन सभी आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण है जो SC, ST या OBC जाति प्रमाण पत्र बनवाना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि आवेदन सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ही किया जाना चाहिए, अन्यथा प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो सकती है।

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