रायपुर/छत्तीसगढ़:गणेश चतुर्थी जैसे बड़े हिंदू पर्व के मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार ने डीजे साउंड बजाने पर सख्त पाबंदी लगाई है। पुलिस प्रशासन ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि त्यौहार के दौरान कहीं भी डीजे बजाते हुए पाए जाने पर संबंधित आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का तर्क है कि डीजे से ध्वनि प्रदूषण फैलता है, झगड़े-फसाद होते हैं और शांति व्यवस्था बिगड़ती है।लेकिन इस फैसले के साथ ही एक बड़ा सवाल उठ रहा है—अगर डीजे को हिंसा और विवाद का कारण मानकर बैन किया जा रहा है, तो फिर शराब की दुकानों को अनुमति क्यों दी जा रही है? क्योंकि अक्सर देखा गया है कि लड़ाई-झगड़े और सड़क हादसों की जड़ शराब ही होती है।
डीजे पर रोक, शराब पर छूट – विरोधाभास क्यों?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार का यह रवैया पूरी तरह से विरोधाभासी है। एक ओर त्यौहारों में धार्मिक आयोजनों पर डीजे बैन कर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर नई-नई शराब दुकानें खोली जा रही हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि चुनावी प्रचार के समय न तो डीजे पर रोक लगाई जाती है और न ही दूसरे धर्मों के त्यौहारों पर इस तरह की पाबंदियां लागू होती हैं।जनता का कहना है कि यदि सरकार को वास्तव में शांति व्यवस्था बनाए रखनी है, तो उसे शराब की दुकानों पर नियंत्रण करना चाहिए। क्योंकि शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले लोगों पर रोज़ाना जुर्माना लगाया जाता है, वहीं दूसरी ओर सरकार शराब बिक्री से राजस्व कमाने के लिए दुकानों की संख्या बढ़ा रही है
।सड़क हादसे और घरेलू हिंसा का बड़ा कारण शराब
आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में रोज़ाना सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में शराब सेवन कर वाहन चलाना एक मुख्य कारण होता है। इसके अलावा, घरेलू विवाद और पारिवारिक हिंसा जैसी घटनाओं में भी शराब की बड़ी भूमिका होती है।इसके बावजूद सरकार शराब दुकानों को खुली छूट देती है। आलोचकों का कहना है कि इससे सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े होते हैं—क्या वास्तव में यह निर्णय आम जनता की सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए है या केवल धार्मिक आयोजनों पर अंकुश लगाने की एकतरफा सोच है?
सरकार की नीति पर उठ रहे सवाल
विपक्षी दल और आम नागरिक लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि केवल हिंदू त्योहारों पर ही इस तरह के प्रतिबंध क्यों लगाए जाते हैं? अगर डीजे से सच में हिंसा और विवाद बढ़ते हैं, तो चुनावी रैलियों और अन्य अवसरों पर भी इसे पूरी तरह से बंद करना चाहिए।वहीं शराब बिक्री को लेकर भी सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया जा रहा है। एक ओर सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए शराब दुकानों की संख्या बढ़ा रही है, दूसरी ओर शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्ती कर रही है। यह नीति आम जनता को समझ से परे लग रही है।
नतीजा
गणेश चतुर्थी पर डीजे बैन और शराब बिक्री की अनुमति—दोनों फैसलों के बीच विरोधाभास ने छत्तीसगढ़ सरकार को सवालों के घेरे में ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता और विपक्ष के दबाव के बाद सरकार अपनी नीति में बदलाव करती है या नहीं।











