मदन दास की रिपोर्ट
बिलासपुर/कोरबा।
कोरबा एवं कुसमुंडा क्षेत्र के भू-विस्थापितों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर आज 27 जनवरी से एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। भू-विस्थापितों का आरोप है कि सरकार और प्रबंधन की प्राथमिकता सिर्फ कोयला उत्पादन है, लेकिन जिन किसानों की जमीन पर खनन हो रहा है, उन्हें आज तक उनका जायज हक — यानी रोजगार — नहीं दिया गया।
पीड़ित भू-विस्थापित पिछले 15 से 20 वर्षों से रोजगार के लिए एसईसीएल के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण उन्हें अब तक रोजगार नहीं मिल पाया है। भू-विस्थापितों का कहना है कि प्रशासन जमीन अधिग्रहण के समय तो बल का प्रयोग करता है, लेकिन रोजगार दिलाने के लिए प्रबंधन पर कोई दबाव नहीं बनाता। इसी मजबूरी में आज उन्हें अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
2007 में हुआ था भूमि अधिग्रहण
एसईसीएल कोरबा क्षेत्र अंतर्गत सरायपाली-बुड़बुड़ परियोजना के लिए ग्राम बुड़बुड़-राहाडीह के किसानों की भूमि वर्ष 2007 में अधिग्रहित की गई थी। उस समय मध्यप्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने के लिए पात्रता प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था और इसी शर्त पर अवार्ड भी पारित हुआ था। तत्कालीन जिलाधीश द्वारा बैठक कर एक सप्ताह के भीतर रोजगार नामांकन लेने के निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत सत्यापन प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी।
लेकिन बाद में प्रबंधन ने अचानक उस सत्यापन को निरस्त कर अपनी बनाई गई कोल इंडिया पॉलिसी 2012 के तहत रोजगार देना शुरू कर दिया, जिससे पहले से नामांकन जमा कर चुके खातेदार आज तक रोजगार से वंचित हैं।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी मिल चुका है आदेश
प्रबंधन की इस तानाशाही से परेशान होकर पीड़ित भू-विस्थापितों ने माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने भू-विस्थापितों के पक्ष में आदेश देते हुए 40 दिनों के भीतर रोजगार देने का निर्देश दिया था। एसईसीएल प्रबंधन ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की, लेकिन वहां भी उनकी अपील खारिज हो गई।
इसके बावजूद एसईसीएल द्वारा तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत कर आज भी रोजगार से वंचित किया जा रहा है।
इसी तरह कुसमुंडा क्षेत्र में भी पुराने अर्जन मामलों में वर्ष 2014 के बाद “अर्जन के बाद जन्म” का हवाला देकर लोगों को रोजगार से वंचित किया गया, जबकि ऐसी कोई नीति न तो राज्य सरकार ने जारी की है और न ही एसईसीएल ने। इस संबंध में भी माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट आदेश दिए जा चुके हैं कि अर्जन के बाद जन्मे व्यक्ति भी रोजगार के पात्र हैं।
माटी अधिकार मंच की चेतावनी
माटी अधिकार मंच ने भू-विस्थापितों की पीड़ा को गंभीर बताते हुए कहा है कि मुख्यालय और प्रबंधन की तानाशाही के कारण विस्थापित अनशन पर बैठने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन अनशनकारियों को रोजगार नहीं दिया गया, तो फरवरी माह में कुसमुंडा क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
अनशन में शामिल भू-विस्थापित
अनशन पर बैठने वालों में —
कोरबा क्षेत्र से: हेमलाल श्रीवास, संतोष कुमार, रूपचंद जायसवाल, शिव कुमार, रामकुमार, दिलीप कुमार
कुसमुंडा क्षेत्र से: पवन पटेल, राजेंद्र प्रसाद, देवाशीश श्रीवास, रवि यादव, अजय पटेल, श्यामलाल, मोहन पटेल, मनोज कुमार, सुदामा, उज्जैन, हिमांशु और गोपाल शामिल हैं।











