बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत में भू-विस्थापितों को नौकरी देने के लिए बनाई गई वरीयता सूची में भारी फर्जीवाड़ा, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन छत्तीसगढ़ ने कलेक्टर बिलासपुर और मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
संगठन का आरोप है कि एनटीपीसी सीपत द्वारा तैयार की गई वरीयता सूची में योग्य और वास्तविक भू-विस्थापितों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया, जबकि अयोग्य व्यक्तियों को नौकरी दे दी गई। इससे सैकड़ों प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय हुआ है।
कई बार हो चुकी शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ित भू-विस्थापितों द्वारा कई बार कलेक्टर, शासन और संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपा गया। यहां तक कि छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक न तो फर्जी सूची रद्द की गई और न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
इसका नतीजा यह है कि आज भी अयोग्य लोग नौकरी कर रहे हैं और असली हकदार दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
ग्रामीणों और संगठन का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो भू-विस्थापितों और डिग्री-डिप्लोमा कर चुके स्थानीय युवाओं को कभी भी उनका हक नहीं मिल पाएगा। यह सीधे-सीधे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि यदि इस गंभीर मामले में शीघ्र, ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो यह एनटीपीसी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
संगठन की प्रमुख मांगें:
✅ फर्जी वरीयता सूची की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच
✅ दोषी अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई
✅ सभी वास्तविक भू-विस्थापितों को तत्काल नौकरी
✅ पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अगर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन इस गंभीर मामले में वास्तव में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।











