रायपुर/छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट द्वारा 5 दिसंबर 2025 को पारित आदेश, जिसमें शिक्षकों की वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति तिथि से निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं, ने प्रदेश के हजारों शिक्षकों में नई उम्मीद जगा दी है।
इस फैसले से प्रदेश के उन 25 हजार से अधिक शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है, जिनकी वरिष्ठता पूर्व में स्थानांतरण या अन्य प्रशासनिक कारणों से प्रभावित हुई थी और जिनका प्रमोशन वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है।
हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण आदेश के बाद वरिष्ठता प्रभावित शिक्षकों के हितों के लिए गठित राज्य स्तरीय शिक्षक संघ की गतिविधियां तेज हो गई हैं। संगठन का मानना है कि यदि न्यायालय के आदेश का सही और पूर्ण रूप से पालन किया गया, तो बड़ी संख्या में शिक्षकों के पदोन्नति का रास्ता साफ हो जाएगा।
इसी क्रम में राज्य स्तरीय शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि —
जब तक नई वरिष्ठता सूची जारी नहीं होती, तब तक प्रमोशन प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार प्रथम नियुक्ति तिथि के आधार पर नई वरिष्ठता सूची तैयार कर प्रकाशित की जाए।
वरिष्ठता विवाद से प्रभावित शिक्षकों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए।
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग द्वारा आदेश के पालन में अनावश्यक देरी की गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में प्रक्रिया शुरू किए जाने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय आने तक हजारों शिक्षक आशा और इंतजार के बीच बने हुए हैं।











