कोरबा।
एसईसीएल गेवरा प्रबंधन द्वारा कुसमुंडा–हरदीबाजार मुख्य मार्ग को खदान विस्तार के लिए जेसीबी से खोदने का कार्य शुरू किया गया, जिसे लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों ने जोरदार विरोध किया। छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS) के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर सड़क पर खुदे गड्ढे को पाट दिया और खनन कार्य को बंद करा दिया।
यह कार्रवाई कटघोरा एसडीएम, दीपका, कुसमुंडा और हरदीबाजार थाना प्रभारी की मौजूदगी में की जा रही थी। लेकिन भारी पुलिस बल के बीच भी ग्रामीणों के तीव्र विरोध के चलते एसईसीएल को खदान विस्तार का काम रोकना पड़ा।
किसानों ने जताया आक्रोश — “बसावट और रोजगार दिए बिना नहीं होने देंगे खनन कार्य”
किसान सभा के सचिव दीपक साहू ने कहा कि जब तक भू-विस्थापित परिवारों को बसावट और हर खातेदार को रोजगार नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का खनन कार्य नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर को गेवरा कार्यालय का महाघेराव किया जाएगा।
किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल को छोटे-बड़े सभी विस्थापित परिवारों को नियमित रोजगार और उचित मुआवजा देना होगा। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि “प्रशासन एसईसीएल के पक्ष में काम कर रही है, जबकि उसे विस्थापितों की समस्या सुननी चाहिए।”
ग्रामीणों की भावनाएं — “हमारे अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी”
नरईबोध गोलीकांड के शहीद गोपाल दास के पुत्र रमेश दास ने कहा,
“मेरे पिता गांव की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे। हम भी अपने अधिकारों की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ेंगे। जब तक प्रशासन भू-विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं करता, तब तक खदान विस्तार को किसी भी हाल में नहीं होने देंगे।”
किसान सभा की प्रमुख मांगें
- सभी प्रभावित खातेदारों को स्थायी रोजगार दिया जाए।
- विस्थापित परिवारों को बसावट की सुविधा प्रदान की जाए।
- प्रभावित गांवों में पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था की जाए।
- सभी लंबित रोजगार प्रकरणों का शीघ्र समाधान किया जाए।
स्थानीय प्रतिनिधियों का समर्थन
आंदोलन में जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि एवं पूर्व जनपद सदस्य दामोदर राठौर, उपसरपंच प्रदीप राठौर, सरपंच विष्णु बिंझवार, पंच राजकुमार नामदेव, रथलाल, सम्मेलाल पाटले, प्रकाश, राकेश समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि एसईसीएल ने विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं कीं, तो विरोध और भी तेज़ किया जाएगा।











