“Leading the Power Sector” का दावा करने वाला NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) आज किसानों के गुस्से का कारण बन गया है। बिलासपुर के पास स्थित NTPC सीपत प्लांट के लिए करीब 3000 किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय किसानों और उनके परिजनों को रोजगार और सुनहरे भविष्य का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक अधिकांश प्रभावित परिवारों को स्थायी नौकरी नहीं मिल पाई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि NTPC और प्रशासनिक अधिकारियों ने भ्रष्टाचार करते हुए फर्जी वरीयता सूची बनाई, जिसमें भारी अनियमितताएँ सामने आई हैं। यही कारण है कि अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का कहना है कि NTPC द्वारा रोजगार न देना उनके साथ किया गया बड़ा विश्वासघात है और यह संस्था “भ्रष्टाचार का गढ़” बन चुकी है।











