Raipur News: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले (Chhattisgarh Liquor Scam) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को चौथा पूरक चालान दाखिल किया। 7000 पन्नों की इस चार्जशीट में ईडी ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ही इस घोटाले के असली मास्टरमाइंड थे।
ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल पर्दे के पीछे से शराब सिंडिकेट को कंट्रोल करते थे और घोटाले से कमाए गए लगभग 1000 करोड़ रुपये का सीधा प्रबंधन करते थे। यह पूरा घोटाला करीब 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का माना जा रहा है, जो साल 2019 से 2022 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ।
चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ कि चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर और रामगोपाल अग्रवाल के बीच नकदी लेन-देन के लिए “सामान” शब्द का इस्तेमाल होता था। बंसल ने ईडी को दिए बयान में कहा कि वह नियमित रूप से रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास जाते थे। वहीं एक मुलाकात के दौरान, भूपेश बघेल ने साफ तौर पर बताया था कि अनवर ढेबर उन्हें “सामान” भेजेंगे, जिसे आगे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाना होगा।
दरअसल, ‘सामान’ शब्द नकदी के लिए कोड वर्ड के रूप में प्रयोग किया जाता था। अग्रवाल फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
ईडी का दावा है कि इस पूरे घोटाले में एक IAS अधिकारी और अन्य प्रमुख लोग भी शामिल थे, जो सिंडिकेट को कंट्रोल कर रहे थे।











