कोरबा। बालको नगर क्षेत्र की एक महिला शिक्षिका ने अपने पति प्रोमित रंजन डे के विरुद्ध शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना की शिकायत करते हुए दण्डात्मक कार्यवाही की मांग की है। महिला द्वारा प्रस्तुत आवेदन में मारपीट, चारित्रिक लांछन, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी तथा जबरन लिखित बयान लेने के प्रयास का उल्लेख किया गया है।
बताया गया है कि उनके पति बालको नगर स्थित Delhi Public School में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
महिला के कथनानुसार 17 फरवरी 2026 को उसके साथ मारपीट की घटना हुई, जिससे सिर, गाल एवं आंख के मध्य चोट आई। इस संबंध में वह शिकायत दर्ज कराने बालको थाना पहुँची थीं। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि उसे अपनी शिकायत पर उचित कार्यवाही नहीं होने की आशंका है।
महिला ने यह भी उल्लेख किया है कि उसे मायके जाने से रोका जा रहा है तथा उससे यह लिखित रूप में देने का दबाव बनाया जा रहा है कि वह अपनी इच्छा से घर छोड़ रही है और भविष्य में किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं करेगी। ऐसा न करने पर झूठे प्रकरण में फँसाने की बात कही जाने का भी उल्लेख आवेदन में है।
🔎 कानूनी विश्लेषण: BNS की संभावित धाराएँ
प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की निम्न धाराएँ लागू हो सकती हैं:
1️⃣ धारा 85 BNS – पति या उसके रिश्तेदार द्वारा क्रूरता
मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना की स्थिति में लागू।
2️⃣ धारा 115 BNS – स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
मारपीट कर शारीरिक चोट पहुँचाने की स्थिति में।
3️⃣ धारा 351 BNS – आपराधिक धमकी
जान से मारने या झूठे प्रकरण में फँसाने की धमकी।
4️⃣ धारा 352 BNS – शांति भंग करने संबंधी कृत्य
अशोभनीय गाली-गलौज जैसी परिस्थितियों में।
5️⃣ धारा 62 BNS – आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण (परिस्थितियों पर निर्भर)
महिला ने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा विधि अनुसार कार्यवाही किए जाने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि उसके साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके पति जिम्मेदार होंगे।
समाज में उठ रहे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी हो रही है कि यदि एक शिक्षित एवं शिक्षक के पद पर कार्यरत व्यक्ति के विरुद्ध इस प्रकार की शिकायत सामने आती है, तो यह समाज के लिए चिंताजनक विषय है। शिक्षा का क्षेत्र मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में लोगों के बीच यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि शिक्षकों के निजी जीवन में इस प्रकार के विवाद सामने आते हैं, तो विद्यार्थियों पर उसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
हालाँकि, पूरे मामले की सच्चाई विधिक जाँच और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।











