कुसमुंडा SECL से कोयला निकासी पर बड़ा सवाल
“काफी समय से ले जा रहे हैं” — त्रिपुरा रायफल्स का दावा, क्या चल रहा है बड़ा खेल?
कोरबा। जिले के कुसमुंडा क्षेत्र स्थित South Eastern Coalfields Limited (SECL) की खदान से कोयला निकासी का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, त्रिपुरा रायफल्स के कैंपर वाहन क्रमांक CG 12 AZ 9600 में कोयला भरकर ले जाया जा रहा था। जब वाहन को रोका गया और पूछा गया कि कोयला कहां ले जाया जा रहा है, तो जवाब मिला — “मेस में खाना बनाने के लिए।”
लेकिन जब लिखित अनुमति या वैध दस्तावेज दिखाने की मांग की गई, तो मौके पर कोई स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
“काफी समय से ले जा रहे हैं” — बयान ने बढ़ाए सवाल
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि वे “काफी समय से” इसी तरह कोयला ले जाते रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है —
अगर यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, तो क्या यह SECL प्रबंधन की जानकारी और अनुमति से हो रही है?
क्या इसके लिए कोई अधिकृत आदेश, आवंटन पत्र या रजिस्टर एंट्री है?
दोहरा मापदंड?
यहां एक अहम तथ्य भी सामने आता है —
यदि SECL का कोई सामान्य कर्मचारी थोड़ी मात्रा में कोयला घर में उपयोग के लिए ले जाते पकड़ा जाता है, तो उस पर तत्काल खदान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है।
लेकिन इस मामले में, यदि सुरक्षा में तैनात बल के लोग ही खदान से कोयला ले जाते दिख रहे हैं, तो क्या उन पर भी वही नियम लागू होंगे?
क्या कानून और नियम सभी के लिए समान हैं?
राष्ट्रीय संपत्ति पर पारदर्शिता जरूरी
SECL एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम है और खदान से निकलने वाला कोयला राष्ट्रीय संपत्ति है।
यदि मेस उपयोग के लिए कोयला आवंटित किया गया है, तो इसकी प्रक्रिया पारदर्शी और दस्तावेजित होनी चाहिए।
यदि कोई वैध अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए ।
अब सबकी निगाहें SECL प्रबंधन और Tripura State Rifles के वरिष्ठ अधिकारियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हैं।
जनता जानना चाहती है —
क्या यह नियमित और अधिकृत प्रक्रिया है?
या फिर व्यवस्था में कहीं कोई बड़ी चूक हो रही है?









