⛽ रूस ने Diesel Export Ban बढ़ाया, वैश्विक Fuel Market में बढ़ी चिंता
मॉस्को। रूस ने घरेलू ईंधन आपूर्ति को लेकर लगाए गए डीजल निर्यात प्रतिबंध को अक्टूबर के अंत तक बढ़ा दिया है। रूस सरकार ने 30 सितंबर को इस विस्तार की पुष्टि की। रूस दुनिया के प्रमुख डीजल निर्यातकों में शामिल है, इसलिए उसके निर्यात पर रोक से पहले से दबाव झेल रहे वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
🚨 क्यों बढ़ाई गई रोक?
रॉयटर्स के अनुसार, रूस ने पहले भी घरेलू ईंधन की कीमतों और उपलब्धता को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों से उत्पादन प्रभावित होने के बाद घरेलू ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा था।
रूस ने पहले डीजल निर्यात प्रतिबंध को सितंबर के अंत तक बढ़ाया था। अब इसे अक्टूबर के अंत तक जारी रखने का फैसला किया गया है।
🌍 दुनिया में Diesel Supply पर क्यों असर?
रूस आम तौर पर दुनिया के सबसे बड़े डीजल निर्यातकों में से एक है। ऐसे समय में जब ईरान और यूक्रेन से जुड़े संघर्षों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले ही प्रभावित है, रूस की ओर से निर्यात सीमित रहने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसी बीच चीन के रिफाइनरों द्वारा अक्टूबर में कुछ तेल उत्पादों के निर्यात को रोकने की खबर भी सामने आई है। इससे वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं और बढ़ी हैं।
📈 कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर
इन घटनाक्रमों के बीच 1 अक्टूबर को Brent crude की कीमत 4 डॉलर से अधिक बढ़कर $102.31 प्रति बैरल पर बंद हुई थी। 2 अक्टूबर को Brent करीब $102.60 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
हालांकि, रूस के डीजल प्रतिबंध का भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधे कितना असर पड़ेगा, यह अभी तय नहीं है। भारत में खुदरा ईंधन कीमतें कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करती हैं।
🇮🇳 भारत के लिए क्या मायने?
भारत दुनिया के बड़े तेल उपभोक्ताओं में है। वैश्विक स्तर पर डीजल और कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर परिवहन, कृषि और माल ढुलाई की लागत पर असर पड़ सकता है। रॉयटर्स ने भी डीजल को परिवहन, कृषि और उद्योग के लिए महत्वपूर्ण ईंधन बताया है।
फिलहाल इसे “भारत में डीजल महंगा होने की पुष्टि” के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। अभी खबर का मुख्य असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों से जुड़ी चिंता है।
