September 25, 2026

झीरम घाटी केस: 10 दोषियों की फांसी पर अब हाईकोर्ट में सुनवाई

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NIA कोर्ट के मृत्युदंड की पुष्टि के लिए पहुंचा डेथ रेफरेंस, डिवीजन बेंच करेगी न्यायिक समीक्षा

बिलासपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में अब अगली बड़ी कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट पहुंच गई है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत द्वारा 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर भेजा गया है।

विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को झीरम घाटी मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया था। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 को दोषी करार दिया था।

⚖️ अब हाईकोर्ट में क्या होगा?

मृत्युदंड के मामलों में संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा सजा की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया होती है। इसी प्रक्रिया के तहत डेथ रेफरेंस हाईकोर्ट पहुंचा है। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच मामले के रिकॉर्ड, साक्ष्यों, ट्रायल कोर्ट के फैसले और मृत्युदंड के आदेश की समीक्षा करेगी।

यानी NIA विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा अभी अंतिम रूप से निष्पादित होने की स्थिति में नहीं है। हाईकोर्ट की पुष्टि और आगे उपलब्ध कानूनी उपायों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के अनुसार विशेष अदालत ने भी स्पष्ट किया था कि मृत्युदंड का निष्पादन हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना नहीं किया जाएगा।

🔴 2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सहित 29 लोगों की मौत हुई थी। मामले की सुनवाई के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

अब करीब 13 साल बाद मामला एक और महत्वपूर्ण न्यायिक चरण में पहुंच गया है।

फिलहाल सवाल यह है—क्या छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट विशेष NIA अदालत द्वारा दी गई 10 मृत्युदंड की सजा की पुष्टि करेगा, या मामले में कोई अन्य न्यायिक आदेश सामने आएगा?

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही इस संबंध में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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