September 20, 2026

CGPSC भर्ती घोटाले में पूर्व सचिव को हाईकोर्ट से झटका, जमानत खारिज; कोर्ट की सख्त टिप्पणी- ‘पेपर लीक हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध’

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बिलासपुर | CGTMN News

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 के बहुचर्चित भर्ती घोटाले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों पर कड़ी टिप्पणी की है।

जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना ऐसा गंभीर अपराध है, जो लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “पेपर लीक हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है, क्योंकि हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, जबकि पेपर लीक से पूरे समाज और व्यवस्था का विश्वास टूटता है।”

सीबीआई जांच में क्या सामने आया?

सीबीआई की जांच के अनुसार वर्ष 2020 से 2022 के दौरान, जब CGPSC राज्य सेवा परीक्षा आयोजित की जा रही थी, उस समय जीवन किशोर ध्रुव आयोग के सचिव के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लंघन करते हुए मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराए।

सीबीआई द्वारा भिलाई स्थित उनके आवास पर की गई छापेमारी में सामान्य अध्ययन (पेपर-7) के उत्तर तथा निबंध (पेपर-2) से संबंधित प्रश्न और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां बरामद हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि पेपर-7 के 47 प्रश्नों में से 42 प्रश्न वही थे, जो आरोपी के घर से जब्त दस्तावेजों में पाए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी प्रश्नपत्र लीक के आधार पर उनके पुत्र सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जीवन किशोर ध्रुव ने पहले ही आयोग को अपने पुत्रों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी दे दी थी और वे गोपनीय कार्यों से स्वयं को अलग रख चुके थे। इसके अलावा उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति, लंबे समय से जेल में रहने तथा सह-आरोपियों को मिली राहत का हवाला देते हुए जमानत की मांग की।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जो अधिकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करते हैं, वे लाखों युवाओं की मेहनत और सपनों के साथ विश्वासघात करते हैं। कोर्ट ने इसे “बाड़ ही खेत को खाने” जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य अपराध नहीं माना जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं के विश्वास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।

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