कुसमुंडा खदान में सुरक्षा से खिलवाड़? 10 साल पुरानी बस से मजदूरों का परिवहन, नीलकंठ के HR मुकेश सिंह की भूमिका पर भी सवाल
कोरबा/कुसमुंडा। SECL कुसमुंडा क्षेत्र में निजी कंपनी नीलकंठ द्वारा मजदूरों के परिवहन में कथित तौर पर करीब 10 साल पुरानी बस का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आने के बाद खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला सिर्फ पुराने वाहन के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक एक स्कूल बस का भी मजदूरों के परिवहन में उपयोग किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर खदान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में मजदूरों की सुरक्षा के साथ यह लापरवाही किसकी अनुमति से हो रही है?
🚨 मजदूरों की सुरक्षा से समझौता क्यों?
खदान क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए परिवहन करने वाले वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, ब्रेक, टायर, सीटिंग क्षमता और अन्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच बेहद जरूरी है।
लेकिन यदि वास्तव में लगभग 10 साल पुराने वाहन को मजदूरों के परिवहन में लगाया गया है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि वाहन की वर्तमान स्थिति और फिटनेस की जांच आखिर किस स्तर पर की गई?
क्या सिर्फ बस चल रही है, इसलिए उसे सुरक्षित मान लिया गया?
या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के साथ वाहन की वास्तविक स्थिति भी देखी है?
🚌 स्कूल बस का खदान में इस्तेमाल?
मामले का दूसरा गंभीर पहलू स्कूल बस के उपयोग से जुड़ा है।
यदि स्कूल परिवहन के लिए उपयोग होने वाला वाहन मजदूरों को ढोने में लगाया जा रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस वाहन का पंजीकरण और परमिट किस उपयोग के लिए है और खदान क्षेत्र में मजदूरों के परिवहन के लिए उसका इस्तेमाल नियमों के अनुरूप है या नहीं।
SECL प्रबंधन को इस संबंध में तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
💰 पुराने बस के पीछे आर्थिक खेल तो नहीं?
अब इस पूरे मामले में एक और सवाल उठ रहा है—आखिर पुराने बस को ही मजदूरों के परिवहन में लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
नीलकंठ कंपनी के HR मुकेश सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या बस के चयन, संचालन और भुगतान की प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका है?
क्या पुराने वाहन के लिए कंपनी द्वारा मोटा भुगतान किया जा रहा है?
क्या बस किसी निजी व्यक्ति या संबंधित पक्ष की है?
किसके नाम पर बस है?
कितने रुपये प्रतिमाह भुगतान हो रहा है?
भुगतान की दर किस आधार पर तय हुई?
बस के रखरखाव और मरम्मत का खर्च कौन उठा रहा है?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुराने वाहन का इस्तेमाल केवल सुविधा के लिए है या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत अथवा आर्थिक हित भी जुड़ा हुआ है।
🔴 SECL प्रबंधन से सीधे सवाल
SECL कुसमुंडा क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए—
- क्या 10 साल पुरानी बस की फिटनेस जांची गई है?
- क्या उक्त वाहन को खदान क्षेत्र में मजदूरों के परिवहन की अनुमति है?
- स्कूल बस के उपयोग की अनुमति किसने दी?
- वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है?
- बस के लिए कंपनी कितना भुगतान कर रही है?
- भुगतान और अनुबंध की प्रक्रिया क्या है?
- क्या HR मुकेश सिंह की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका है?
- क्या SECL की सुरक्षा टीम ने इन वाहनों का निरीक्षण किया है?
🔥 हादसे के बाद जागेगा सिस्टम?
खदान क्षेत्र में सुरक्षा के मामले में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “बस चल रही है या नहीं?”
सवाल यह होना चाहिए कि—
“क्या बस मजदूरों को सुरक्षित तरीके से ले जाने के योग्य है?”
और अगर पुराने वाहन के इस्तेमाल के पीछे आर्थिक हित का कोई मामला है, तो दस्तावेजों के आधार पर इसकी जांच कौन करेगा?
अब गेंद SECL प्रबंधन और संबंधित विभाग के पाले में है।
TMN NEWS की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पुराने बस की फिटनेस, परमिट, स्वामित्व, अनुबंध और भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
