August 5, 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दो साल तक भरण-पोषण न देने पर पत्नी को तलाक का अधिकार

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बिलासपुर | Chhattisgarh High Court News
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुस्लिम विवाह कानून से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट और महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पति लगातार दो वर्षों तक पत्नी का भरण-पोषण नहीं करता है, तो ऐसी स्थिति में पत्नी को तलाक लेने का वैधानिक अधिकार होगा, भले ही वह अपने मायके में रह रही हो। यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को आंशिक रूप से सही ठहराते हुए कहा कि भरण-पोषण न देना मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम के तहत विवाह समाप्त करने का एक वैध आधार है।

कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ से जुड़ा मामला

यह मामला छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ क्षेत्र का है। याचिका के अनुसार, महिला की शादी 30 सितंबर 2015 को मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद वह केवल लगभग 15 दिनों तक ही ससुराल में रह सकी। इसके बाद पारिवारिक विवादों के चलते मई 2016 से वह अपने मायके में रहने लगी।

पत्नी के गंभीर आरोप

महिला ने अदालत में आरोप लगाया कि पति ने उस पर 10 लाख रुपये की एफडी तुड़वाने का दबाव बनाया। जब उसने इसका विरोध किया, तो उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालात बिगड़ने पर महिला ने घरेलू हिंसा, धारा 498-ए और भरण-पोषण से जुड़े अलग-अलग कानूनी मामले दर्ज कराए।

भरण-पोषण न देना बना तलाक का आधार

इसके बाद महिला ने फैमिली कोर्ट में मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम के तहत तलाक की याचिका दायर की। फैमिली कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि पति ने लंबे समय तक पत्नी का भरण-पोषण नहीं किया, जो कानूनन गंभीर चूक है। इसी आधार पर कोर्ट ने विवाह विच्छेद का आदेश पारित किया, जिसे हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया।

यह फैसला न केवल इस मामले में अहम है, बल्कि भविष्य में मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण और तलाक से जुड़े अधिकारों को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

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