September 23, 2026

“शिवाय हॉस्पिटल में वेंटिलेटर के लिए पहुंचा मरीज, नहीं मिला इलाज? अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने के बाद मौत”

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वेंटिलेटर और इलाज के लिए अस्पताल-दर-अस्पताल भटकाने का दावा, कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

कोरबा। जिले में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मृतक के परिजन केलाश दास ने जिला कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपकर अस्पतालों की कथित लापरवाही और मरीज को समय पर उपचार नहीं मिलने की जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, अरुण दास (29 वर्ष) को 14 सितंबर 2026 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान अचानक मरीज की स्थिति बिगड़ गई। मरीज को सांस लेने में परेशानी होने पर वेंटिलेटर लगाया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक स्थिति बिगड़ने के बावजूद अस्पताल में सोनोग्राफी और CT स्कैन जैसी जांच नहीं हो सकी।

🏥 वेंटिलेटर के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने का आरोप

परिजनों के अनुसार, मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे निजी अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। रात करीब 11:40 बजे परिजनों ने शिवाय अस्पताल से फोन पर वेंटिलेटर की उपलब्धता के संबंध में जानकारी ली। शिकायत में आरोप है कि अस्पताल की ओर से वेंटिलेटर उपलब्ध होने की बात कही गई, जिसके बाद वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस से मरीज को वहां ले जाया गया।

शिकायत के मुताबिक, रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच मरीज शिवाय अस्पताल पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचने पर परिजनों को कथित तौर पर बताया गया कि वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है।

इसके बाद मरीज को पास स्थित जैन अस्पताल ले जाने की बात शिकायत में कही गई है। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को आगे NKH अस्पताल, कोसाबाड़ी ले जाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आर्थिक समस्या के कारण वहां मरीज को भर्ती नहीं किया जा सका।

😔 वापस शिवाय अस्पताल ले जाने के बाद मौत

शिकायत के अनुसार, इसके बाद मरीज को फिर एंबुलेंस की सहायता से शिवाय अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का दावा है कि मरीज करीब 2 से 3 घंटे तक अस्पतालों के बीच एंबुलेंस में ही घूमता रहा।

⚖️ कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

मृतक के चाचा केलाश दास ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने तथा यदि किसी स्तर पर दोष या लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऐसी घटना भविष्य में किसी अन्य मरीज या परिवार के साथ न हो, इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्था की जांच आवश्यक है।

🔎 बड़ा सवाल

इस शिकायत के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि—

क्या मरीज को समय पर वेंटिलेटर उपलब्ध कराया गया था?

शिवाय अस्पताल द्वारा वेंटिलेटर उपलब्ध होने की जानकारी किस आधार पर दी गई?

जिला अस्पताल से मरीज को रेफर करने की प्रक्रिया क्या थी?

मरीज को अस्पतालों के बीच ले जाने में कितना समय लगा?

क्या सभी संबंधित अस्पतालों में उस समय डॉक्टर और आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध थीं?

क्या आर्थिक कारणों से किसी अस्पताल में मरीज को भर्ती करने से इनकार किया गया?

TMN NEWS इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। मामले की वास्तविक स्थिति अस्पतालों के रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज, एंबुलेंस लॉग और जिला स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद स्पष्ट होगी। संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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