September 3, 2026

🚨 डेढ़ करोड़ की सड़क सालभर भी नहीं चली! गेवरा बस्ती–खोडरी पंतोरा मार्ग फिर जर्जर

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कोरबा। कोयले की अकूत संपदा वाले कोरबा के गेवराबस्ती-कुसमुंडा क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

गेवरा बस्ती से खोडरी पंतोरा जाने वाली सड़क, जिसके निर्माण में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है, निर्माण के एक साल भी पूरे नहीं हुए और सड़क की हालत फिर से खराब हो गई है।

कंक्रीट से बनाई गई इस सड़क पर जगह-जगह गिट्टी और सीमेंट की परत उखड़ने लगी है और गहरे गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। सड़क की मौजूदा स्थिति देखकर सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद सड़क इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गई?

⛏️ जिस इलाके से निकलता है करोड़ों का कोयला, वहीं सड़क बदहाल

यह इलाका SECL की कुसमुंडा परियोजना और गेवराबस्ती क्षेत्र से प्रभावित क्षेत्र है।

जिस क्षेत्र से देश के लिए बड़ी मात्रा में कोयला निकलता है, उसी क्षेत्र के लोगों को अगर कुछ ही महीनों में टूटने वाली सड़क मिले, तो सरकारी विकास कार्यों की प्राथमिकता और गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

💰 डेढ़ करोड़ खर्च, फिर सड़क की ये हालत क्यों?

स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क का निर्माण हुए अभी ज्यादा समय नहीं बीता है, लेकिन सड़क की ऊपरी कंक्रीट परत जगह-जगह से टूटकर उखड़ रही है।

अब सवाल यह है—

क्या निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल किया गया था?

क्या सड़क की मोटाई और कंक्रीट की गुणवत्ता की जांच हुई थी?

काम पूरा होने के बाद किस अधिकारी ने सड़क का निरीक्षण कर उसे पास किया?

और सबसे बड़ा सवाल—

अगर सड़क निर्माण में कोई कमी थी तो जिम्मेदारी किसकी तय हुई?


⚠️ टेंडर से लेकर निर्माण तक जांच की जरूरत

सड़क की मौजूदा हालत को देखते हुए केवल दोबारा मरम्मत करा देना पर्याप्त नहीं होगा।

जरूरत इस बात की है कि पूरे निर्माण की जांच हो—

सड़क की स्वीकृत लागत कितनी थी?

टेंडर कितनी राशि में हुआ?

काम किस ठेकेदार को मिला?

सड़क की निर्धारित मोटाई कितनी थी?

निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता क्या थी?

कंक्रीट की टेस्ट रिपोर्ट क्या कहती है?

निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी किस इंजीनियर ने की?

सड़क का अंतिम निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?

ठेकेदार की Defect Liability Period कितनी है?

सड़क खराब होने के बाद ठेकेदार को नोटिस दिया गया या नहीं?

इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।


💥 कमीशन के आरोप भी जांच के घेरे में आएं

स्थानीय स्तर पर सरकारी निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी के आरोप अक्सर लगाए जाते रहे हैं। इस मामले में भी यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसा कोई दस्तावेजी प्रमाण है कि स्वीकृत राशि का दुरुपयोग हुआ या निर्माण में जानबूझकर गुणवत्ता से समझौता किया गया, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

बिना प्रमाण किसी ठेकेदार या अधिकारी को भ्रष्ट कहना उचित नहीं होगा, लेकिन सड़क की इतनी जल्दी खराब हुई स्थिति अपने आप में गुणवत्ता की जांच का पर्याप्त कारण जरूर है।


🔴 सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, जनता के पैसे का है

अगर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क कुछ ही समय में टूटने लगे तो सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं है।

सवाल है—

जनता के पैसे से बना काम आखिर कितने साल चलना चाहिए?

अगर सड़क समय से पहले खराब हो गई तो क्या इसे बनाने वाले ठेकेदार से दोबारा अपने खर्च पर काम कराया जाएगा?

या फिर मरम्मत के नाम पर एक बार फिर सरकारी पैसा खर्च होगा?

अगर सड़क की गुणवत्ता सही थी तो वह इतनी जल्दी क्यों टूटी?

और अगर गुणवत्ता सही नहीं थी तो उसे पास किसने किया?


🏭 SECL क्षेत्र की सड़कों की व्यापक जांच की जरूरत

गेवरा बस्ती–खोडरी पंतोरा मार्ग की हालत को एक अलग घटना मानकर छोड़ देना भी उचित नहीं होगा।

गेवरा, कुसमुंडा और दीपका जैसे बड़े कोयला क्षेत्रों में भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है।

इसलिए अब जरूरत है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों की प्रमुख सड़कों का गुणवत्ता और सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।

कहां-कहां सड़कें खराब हैं?

कहां नई सड़क बनी है?

कितनी लागत आई?

कितने समय में सड़क खराब हुई?

किस ठेकेदार ने काम किया?

और सड़क की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?

इन सभी सवालों का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।


🎯 TMN News का सीधा सवाल

गेवरा बस्ती–खोडरी पंतोरा सड़क की मौजूदा हालत देखकर अब संबंधित विभाग और SECL प्रबंधन को सामने आकर बताना चाहिए कि सड़क निर्माण में कितनी राशि खर्च हुई, काम किसने किया और सड़क के इतनी जल्दी खराब होने पर जिम्मेदारी किसकी है।

क्योंकि विकास का मतलब सिर्फ टेंडर जारी होना और सड़क बन जाना नहीं है। विकास तब माना जाएगा, जब जनता के पैसे से बनी सड़क टिकाऊ भी हो और उसका लाभ वर्षों तक लोगों को मिले।

डेढ़ करोड़ की सड़क अगर सालभर भी नहीं चली, तो अब सड़क की मरम्मत से पहले इसकी गुणवत्ता और जिम्मेदारी की जांच जरूरी है।

TMN News का सवाल यही है—
👉 सड़क इतनी जल्दी क्यों टूटी?
👉 गुणवत्ता की जांच किसने की?
👉 जिम्मेदारी किसकी है?
👉 और जनता के पैसे का पूरा हिसाब कब मिलेगा?