कोरबा/कुसमुंडा।
कुसमुंडा क्षेत्र में पहली ही तेज बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनटीपीसी पुल से गेवरा-दीपका जाने वाले मुख्य मार्ग पर पहले रेलवे अंडरब्रिज जलभराव से तालाब में तब्दील हो गया और अब उसी मार्ग की नई डामरी सड़क कई फीट तक धंस गई। इस घटना में कई दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक हादसे का शिकार हुए तथा कुछ लोगों को चोटें भी आईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सड़क का निर्माण कुछ ही समय पहले हुआ था, वह पहली बारिश भी नहीं झेल सकी। सड़क धंसने और अंडरब्रिज में जलभराव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी सड़क नहीं धंसती।
यह मार्ग कुसमुंडा, गेवरा और दीपका को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। बारिश के दौरान लोगों को जान जोखिम में डालकर जलभराव वाले अंडरब्रिज से गुजरना पड़ा और जो किसी तरह वहां से निकले, वे धंसी हुई सड़क के कारण दुर्घटना का शिकार हो गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में सड़क और अंडरब्रिज की ऐसी स्थिति कैसे हो गई? क्या निर्माण कार्य में भारी लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता किया गया? यदि ऐसा है तो इसके लिए जिम्मेदार इंजीनियर, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही?
जिला प्रशासन की दायित्व
➡️ धंसी हुई सड़क और जलभराव की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
➡️ निर्माण एजेंसी, संबंधित इंजीनियर और ठेकेदार की जवाबदेही तय कर नोटिस जारी किया जाए।
➡️ यदि निर्माण में अनियमितता या भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
➡️ भविष्य में आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सड़क की तत्काल मरम्मत और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए।
जनता का पैसा किसी की लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ सकता। पहली ही बारिश में सड़क धंसना केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि जवाबदेही का गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई करता है या मामला सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह जाता है।










