August 12, 2026

छत्तीसगढ़ मंत्रालय में अब अनिवार्य होगी आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली, 1 दिसंबर से लागू

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रायपुर, 19 नवंबर 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और समयपालन को मजबूत करने के उद्देश्य से महानदी भवन और इन्द्रावती भवन के सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव विकास शील की उपस्थिति में आयोजित बैठक में फेसियल ऑथेंटिकेशन और आधार-सक्षम बायोमेट्रिक मशीनों का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया।

1 दिसंबर से अनिवार्य, 1 जनवरी से सभी संचालनालय शामिल

राज्य सरकार ने बताया कि इस नई उपस्थिति प्रणाली का ट्रायल तुरंत शुरू किया जाएगा, जबकि 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाएगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि 1 जनवरी 2026 से सभी संचालनालयों और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी यह व्यवस्था लागू कर दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समयपालन और उपस्थिति नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।


कर्मचारियों के लिए दो उपस्थिति विकल्प उपलब्ध

  1. मोबाइल ऐप के जरिए फेसियल ऑथेंटिकेशन

कर्मचारी स्मार्टफोन पर उपलब्ध आधार-आधारित फेसियल वेरिफिकेशन सिस्टम की मदद से IN और OUT उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। यह तरीका तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा।

  1. प्रवेश द्वारों पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक डिवाइस

मंत्रालय भवनों के मुख्य द्वारों पर थंब-बेस्ड बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित कर दी गई हैं। कर्मचारी अपनी सुविधा अनुसार किसी भी विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी प्रवेश द्वारों पर उपकरण लगा दिए हैं और नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है, जिससे सिस्टम सुचारू रूप से संचालित हो सके।


कर्मचारियों को आधार व सेवा विवरण अपडेट करने के निर्देश

सरकार ने सभी कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे उपस्थिति पोर्टल में अपने आधार से जुड़ी जानकारी और सेवा विवरण को सही ढंग से अपडेट कर लें। नई प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा।


AEBAS से बढ़ेगी पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही

राज्य सरकार का कहना है कि आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू होने से सरकारी तंत्र में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही और मजबूत होगी। यह कदम प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और आधुनिक डिजिटल शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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