सत्ता की हनक या दबंगई? मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना के 500 सागौन पौधों पर चला ट्रैक्टर, गोवर्धन सिंह समेत 4 पर गंभीर आरोप!”
सागौन के 500 पौधों पर चला ट्रैक्टर! वन विभाग की जांच में भी पौधे उखाड़े जाने की पुष्टि, गोवर्धन सिंह समेत 4 पर गंभीर आरोप
कटघोरा/मड़वाढोड़ा। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा/किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत निजी भूमि पर लगाए गए 500 सागौन पौधों को ट्रैक्टर से जुताई कर उखाड़ फेंकने का मामला अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। मामले में हितग्राही छेदूलाल कंवर द्वारा की गई शिकायत के बाद वन विभाग की ओर से स्थल जांच कर रिपोर्ट भी तैयार की गई है।

दस्तावेजों के अनुसार, मड़वाढोड़ा निवासी छेदूलाल कंवर ने अपनी निजी भूमि खसरा नंबर 464, रकबा 0.652 हेक्टेयर में योजना के तहत सागौन पौधों के लिए आवेदन किया था। वन विभाग द्वारा 13 जुलाई 2026 को 700 पौधे उपलब्ध कराए गए, जिनमें से 500 पौधों का रोपण किए जाने की शिकायत में जानकारी दी गई है।

शिकायत के मुताबिक 15 जुलाई को दोपहर करीब 3:10 बजे गोवर्धन सिंह कंवर, महेन्द्र पाल सिंह कंवर, चित्रभवन सिंह कंवर एवं आनंद भवन सिंह कंवर मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने श्रमिकों के साथ गाली-गलौज की और धमकी देते हुए ट्रैक्टर क्रमांक CG 12 BT 1533 से खेत की जुताई कर लगाए गए सागौन पौधों को उखाड़ दिया।

वन विभाग की जांच में क्या सामने आया?
मामले में वन परिक्षेत्र अधिकारी कटघोरा द्वारा जारी जांच संबंधी पत्र में स्थल निरीक्षण का उल्लेख है। दस्तावेज में कहा गया है कि मौके की जांच में शिकायत में बताए गए स्थान पर योजना के तहत लगाए गए सागौन पौधों को ट्रैक्टर से जुताई कर उखाड़े जाने की बात पाई गई।
वन विभाग ने संबंधित भूमि के बी-1 एवं पी-2 खसरा नक्शा सहित राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराने के लिए तहसीलदार को भी पत्र भेजा है। दस्तावेजों में कलेक्टर के जनदर्शन में प्रस्तुत शिकायत का भी संदर्भ दिया गया है।
डायल 112 तक पहुंचा मामला
शिकायतकर्ता के अनुसार घटना के तत्काल बाद डायल 112 को दोपहर करीब 3:30 बजे सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने कथित तौर पर ट्रैक्टर को रुकवाया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भूमि को लेकर यदि कोई विवाद था तो संबंधित पक्ष को राजस्व न्यायालय से वैधानिक राहत लेनी चाहिए थी, न कि स्वयं ट्रैक्टर से पौधों को उखाड़ना चाहिए था।
“पूर्व में भी कई मामले” होने का दावा
शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी दावा है कि गोवर्धन सिंह के खिलाफ पूर्व में भी कई आपराधिक मामले/FIR दर्ज रहे हैं और इसी कारण घटना को लेकर परिवार एवं श्रमिकों में भय का माहौल है। हालांकि, इन पुराने मामलों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा FIR की प्रतियां फिलहाल सामने नहीं आई हैं। यदि पुलिस रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि होती है तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
सरकारी योजना को नुकसान, कार्रवाई की मांग
हितग्राही ने वन विभाग एवं प्रशासन से मामले में दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, सागौन पौधों को हुई क्षति का आकलन तथा घटना में प्रयुक्त ट्रैक्टर CG 12 BT 1533 के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब योजना के तहत पौधे रोपे गए थे और वन विभाग ने मामले में स्थल जांच भी की है, तो 500 पौधों को उखाड़ने के आरोप पर पुलिस एवं प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी?
