दीपका कोयला ग्रेड स्लिपेज घोटाले का आरोप: सुप्रीम कोर्ट, PMO, ED और CBI तक पहुंची शिकायत, अरबों रुपये के राजस्व नुकसान का दावा

दीपका कोयला ग्रेड स्लिपेज घोटाले का आरोप: सुप्रीम कोर्ट, PMO, ED और CBI तक पहुंची शिकायत, अरबों रुपये के राजस्व नुकसान का दावा

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले स्थित एसईसीएल की दीपका ओपनकास्ट खदान को लेकर एक कथित “कोयला ग्रेड स्लिपेज घोटाले” का मामला सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू द्वारा एकत्रित दस्तावेजों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) सहित विभिन्न संवैधानिक एवं जांच एजेंसियों को शिकायत भेजी गई है। शिकायत में कोयला ग्रेड निर्धारण, क्रेडिट नोट जारी करने और राजस्व हानि से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या है पूरा आरोप?

शिकायत के अनुसार, दीपका खदान से निकलने वाले कोयले का आधिकारिक ग्रेड G-11 घोषित कर उपभोक्ताओं से भुगतान लिया जाता है। आरोप है कि उपभोक्ता तक पहुंचने के बाद थर्ड पार्टी सैंपलिंग एजेंसियों के माध्यम से कागजों में कोयले का ग्रेड कम दर्शाया जाता है, जिसके आधार पर संबंधित कंपनियों को बाद में क्रेडिट नोट जारी कर बड़ी राशि वापस की जाती है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है तथा कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है।

आंकड़ों से उठे सवाल

शिकायत में संलग्न दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि:

वर्ष 2015-16 में क्रेडिट राशि लगभग ₹2.98 करोड़ थी।

वर्ष 2016-17 में यह बढ़कर ₹31.94 करोड़ से अधिक हो गई।

वर्ष 2018-19 में कथित रूप से ₹140 करोड़ से अधिक की राशि क्रेडिट नोट के माध्यम से समायोजित की गई।

वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा ₹84 करोड़ से अधिक बताया गया है।

इन आंकड़ों को आधार बनाकर शिकायतकर्ता ने विस्तृत वित्तीय जांच की मांग की है।

मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की भी जांच की मांग

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि क्रेडिट नोट जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव कर राशि समायोजन की व्यवस्था क्षेत्रीय स्तर पर कर दी गई, जिसकी जांच मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कराए जाने की मांग की गई है।

सूचना आयोग की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई कुछ जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। साथ ही केंद्रीय सूचना आयोग में हुई अपील की सुनवाई और उसके निर्णय पर भी सवाल उठाए गए हैं।

कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग

शिकायत में कोल इंडिया, एसईसीएल, सीएमपीडीआईएल तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच कर नामजद एफआईआर दर्ज करने और संपत्तियों की जांच कराने की मांग की गई है।

जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। संबंधित एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। यदि जांच एजेंसियां मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करती हैं तो आगे और तथ्य सामने आ सकते हैं।

TMN News | कोरबा

नोट: इस खबर में उल्लिखित सभी तथ्य शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या जांच एजेंसियों द्वारा सत्यापन होना शेष है।