छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी का विस्तार, किसानों की संख्या और उत्पादन में लगातार वृद्धि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों और कल्याणकारी योजनाओं के चलते प्रदेश के किसान न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं, बल्कि खेती का रकबा और उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है।प्रदेश में सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन मूल्य संबंधी वायदे को प्राथमिकता दी। पंजीकृत किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की गई, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। बीते 18 महीनों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार ने लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में सीधे अंतरित किए हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार आया है।खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सरकार ने रिकॉर्ड 24.75 लाख किसानों से 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की, और इसके बदले 32 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसके साथ ही किसान समृद्धि योजना के तहत 13,320 करोड़ रुपये की अंतर राशि भी किसानों को प्रदान की गई। वर्ष 2024-25 में यह रिकॉर्ड और आगे बढ़ा, जब 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी कर 34,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया,

और 12 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि भी किसानों को सीधे दी गई।इसके अलावा, राज्य सरकार ने पूर्व वर्षों के बकाया बोनस के रूप में 3716 करोड़ रुपये का भुगतान भी सुनिश्चित किया है, जिससे किसानों में संतोष और भरोसा बढ़ा है। किसानों का मानना है कि राज्य सरकार की यह नीतियाँ उनके हितों की रक्षा करती हैं

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और उन्हें समृद्धि की राह पर ले जा रही हैं।कृषि पर आधारित राज्य होने के नाते छत्तीसगढ़ की आर्थिक मजबूती का रास्ता खेती से होकर ही गुजरता है। सरकार के ठोस कदमों से यह स्पष्ट हो चुका है कि खेती-किसानी को प्राथमिकता देकर ही छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाया जा सकता है।

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